मेरे पूज्य गुरुदेव
प्रेणना स्रोत :-
मैं अपना गुरु श्री सोहन लाल "स्नेहिल" (कप्तानगंज ,आजमगढ़ ,U .P )को मानता हू क्यों की जब वे अपनी किसी भी रचना को प्रस्तुत करते थे तो मुझे बड़ा अच्छा लगता था ,ऐसा लगता था जैसे वे मुझे कह रहे हों कि "हे महेश बेटे उठो तुम भी कुछ कर दिखाओ " मैं जब भी कोई लेख लिखता हू तो सबसे पहले गुरु जी को श्रद्धा पूर्वक स्मरण करके ही कोई लेख लिखने का कार्य प्रारम्भ करता ह..!
एक दिन की बात है, जब मैं कक्षा 9 में था उस समय 2003-2004 में मैंने अपना पहला कविता "दम है जबतक ,तुम तबतक लड़ते रहो " लिखा उसी समय चीन हमारे देश के अरुणाचल प्रदेश में घुस कर कुछ जगहों पर कब्ज़ा कर लिया ,प्रभावित हो कर मैंने ये कविता लिखा ,ये मेरे जीवन की सबसे पहली कविता थी .
प्रेणना स्रोत :-
मैं अपना गुरु श्री सोहन लाल "स्नेहिल" (कप्तानगंज ,आजमगढ़ ,U .P )को मानता हू क्यों की जब वे अपनी किसी भी रचना को प्रस्तुत करते थे तो मुझे बड़ा अच्छा लगता था ,ऐसा लगता था जैसे वे मुझे कह रहे हों कि "हे महेश बेटे उठो तुम भी कुछ कर दिखाओ " मैं जब भी कोई लेख लिखता हू तो सबसे पहले गुरु जी को श्रद्धा पूर्वक स्मरण करके ही कोई लेख लिखने का कार्य प्रारम्भ करता ह..!
एक दिन की बात है, जब मैं कक्षा 9 में था उस समय 2003-2004 में मैंने अपना पहला कविता "दम है जबतक ,तुम तबतक लड़ते रहो " लिखा उसी समय चीन हमारे देश के अरुणाचल प्रदेश में घुस कर कुछ जगहों पर कब्ज़ा कर लिया ,प्रभावित हो कर मैंने ये कविता लिखा ,ये मेरे जीवन की सबसे पहली कविता थी .
